ऐसा कम ही होता है कि ग्रहण जैसी खगोलीय घटना को लेकर भारतीय ज्योतिष को जानने और समझने वाले अचानक चेतावनी जारी करना शुरू कर दें। अक्सर कहा जाता है कि ज्योतिष और विज्ञानं दो अलग अलग विषय हैं और दोनों का एक दुसरे से कोई जुड़ाव नही है लेकिन विश्व में ऐसे कई मौके आये हैं जब ज्योतिष ने वैज्ञानिकों न सिर्फ चौंकाया है बल्कि उनके ज्योतिष के प्रति नजरिये को भी चुनौती दी है। इस बार ज्योतिष के अनुसार फिर से वह स्थिति बन रही है जो मानव सभ्यता के लिए हितकारी नही है। आकाश में अनेकों खगोलीय घटनाएँ होती रहती हैं लेकिन चन्द्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण ऐसी दो घटनाएँ हैं जो प्रत्यक्ष अनुभव की जा सकती हैं। दस हजार वर्ष से भी पुराने समय से ज्योतिष इन दोनों घटनाओं का प्रभाव मानव जीवन और प्रकृति पर पड़ने की बात कहता आया है। वर्तमान में जो घटनाएँ होने जा रही हैं, इनपर भी ज्योतिष ने विस्तृत जानकारी दी है।
बहुत कम समय के
अन्तराल पर जब ग्रहण पड़ते हैं तो उनका गहरा प्रभाव मानव जीवन पर पड़ता है। हर बार
यह अशुभ ही नही होता लेकिन इस बार यह शुभ नही है। अक्सर भय का माहौल न बने इसलिए
ज्योतिषाचार्य भविष्यवाणी खुलकर नही करते लेकिन चेतावनी जरुर जाहिर करते हैं। इस
बार 05-06 जून को चंद्रग्रहण, 21 जून को सूर्य ग्रहण और 04-05
जुलाई को फिर से चंद्रग्रहण लगने जा रहा है। अभी 05-06 जून
को लगा चन्द्रग्रहण भारत में दिखाई दिया था और आगामी 21 जून का सूर्य ग्रहण भी
भारत में दिखेगा जबकि 04-05 जुलाई का चन्द्रग्रहण भारत में
नही दिखाई देगा।
सबसे पहले हम यह
जानते हैं कि ग्रहणों का बुरा प्रभाव क्यों होने वाला है। वर्ष 2019 के आखिरी सप्ताह में सूर्यग्रहण (26 दिसम्बर) और इसके कुछ ही दिन बाद 10
जनवरी 2020 को चंद्रग्रहण लगा था। इसके बाद भारतीय ज्योतिषाचार्यों ने भारी तबाही
का संकेत दिया था। करीब 58 वर्ष बाद लगे उन ग्रहण से पहले से भारी जान माल के
नुकसान की भविष्यवाणी हो गयी थी। इसके साथ ही पुरे विश्व पर प्राकृतिक आपदा और हिंसा
भड़कने के संकेत दिए गये थे। हम सब जानते हैं कि इन्ही ग्रहणों के साथ कोरोना वायरस
का ऐसा प्रकोप बढ़ा कि लाखों लोगों की जान चली गयी। इसके साथ ही भारत में काफी हिंसा
भी हुई थी। आप तब की गयी भविष्यवाणी यहाँ पढ़ सकते हैं।
अब जो ग्रहण पढ़ रहे
हैं वो दो प्रकार से फल देंगे। पहला की इनकी शुरुआत चन्द्रग्रहण से हो रही है इससे
यह कहा जा रहा है कि 2020 के शुरुआत के ग्रहणों का असर इन ग्रहण से कम हो जायेगा।
यानी कोरोना वायरस के इलाज मिलने की सम्भावना अगले 3 महीनों में है। इसके साथ ही
विश्व में केस घटना शुरू हो सकते हैं। लेकिन 21 जून को पड़ रहे सूर्यग्रहण अपने साथ
भयावह तबाही भी लेकर आ रहा है। इसका एक संकेत लगातार आ रहे भूकम्प हैं, अभी तक ऐसा
कभी नही हुआ था। ज्योतिष की माने तो 6 से
ज्यादा तीव्रता का भूकम्प भारत के उत्तरी दिशा में आ सकता है। वंही विश्व भर में
भी एक बड़ा झटका लग सकता है। सूर्य ग्रहण से एक सप्ताह पहले से और एक सप्ताह बाद तक
भूकम्प की सम्भावना प्रबल है। इसके साथ ही ग्रहणों की स्थिति अनुसार युद्ध हालत
बनने तय हैं। अमेरिका और यूरोप में हिंसा का माहौल बनेगा। नुकसान किसी भी रूप में
हो लेकिन मानव सभ्यता के लिए विशेष होगा। ग्रहण जहाँ जहाँ दृश्य होगा इस रेखा के
उपर के देशों में यानी इथियोपिया, सऊदी अरब ईरान का नीचला हिस्सा, बलूचिस्तान,
सिंध, हरियाणा- राजस्थान बोर्डर, उत्तर प्रदेश का कुछ पश्चिमी हिस्सा, उत्तराखंड,
तिब्बत और चीन, इन सभी इलाकों और इसके उपर के क्षेत्र में हालात पर असर पड़ेगा।
इन सबके साथ भारत
पर विशेष प्रभाव पड़ सकता है लेकिन भारत का कम हिस्सा ही इसके लिए प्रभावकारी है।
एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना
इस घटना का जो
प्रभाव विश्व पर पड़ेगा, वह तय है। ऐसे में आप इस घटना के अनुभव करने के महत्वपूर्ण
मौके न छोड़े। भारत के कुरुक्षेत्र और सिरसा से बेहतरीन दृश्य दिखेंगे। जबकि
गुरुग्राम, दिल्ली से भी कम रोमांचकारी नही होगा।
गुरुग्राम से रोमांचकारी
दृश्य दिखने का समय यहाँ जाने।




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