यूजीसी की नई गाइडलाइन्स - छात्रों की बढ़ी परेशानी


कहा जाता है कि परिस्थितियाँ बदलते देर नही लगती। अभी हाल ही में हरियाणा सरकार ने कॉलेज छात्रों को जनरल प्रोमोट करने के जिस फैसले पर मुहर लगाई वो केंद्र सरकार ने पलट दिया। हरियाणा में लगभग एक महीने से जारी छात्र आन्दोलन के कारण और परिस्थितियों को देखते हुए हरियाणा सरकार ने यह फैसला लिया था। सिर्फ हरियाणा ही नही बल्कि राजस्थान, मध्यप्रदेश, उड़ीसा, महाराष्ट, उत्तर प्रदेश भी ऐसा ही फैसला ले चुके थे।

हाल ही में 6 जुलाई को आई यूजीसी के दिशानिर्देशों के बाद इन सभी राज्य सरकारों के फैसले पर विराम लग गया। यह जानना जरूरी है कि इन तमाम राज्य सरकारों ने अपने स्तर पर प्रमोशन का फैसला लिया था और UGC का फैसला तब तक नही आया था। UGC की संशोधित दिशानिर्देशों के बाद विद्यार्थियों की दुविधा फिर से बढ़ गयी है। अभी सबसे बड़ा सवाल यह है कि दो अलग अलग निर्देशों के बाद परीक्षाएं होंगी या नही। इसी पर गुरुग्राम मिरर लाया है UGC दिशानिर्देशों का वह विश्लेष्ण जिसे आप सभी को पढना चाहिए।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी वह आयोग जो राष्ट्रीय स्तर पर विश्विद्यालयों को मोनिटर करता है। UGC ने अभी तक दो बार दिशानिर्देश दिए हैं। पहली बार गाइडलाइन्स 29 अप्रैल 2020 को जारी किये गये थे। उसके बाद कुछ बदलाव करके अब फिर से गाइडलाइन्स जारी की गयी हैं। विद्यार्थियों को यह जरुर याद रखना चाहिए कि 29 अप्रैल को जारी पहली गाइडलाइन्स में UGC ने सभी विश्वविद्यालयों को सभी इयर के एग्जाम कराने के निर्देश दिए थे। इसके साथ ही बाकि बचे सिलेबस को ऑनलाइन पूरा करने की बात कही थी। UGC ने स्थिति को देखते हुए अप्रैल में होने वाली परीक्षाएं जुलाई में करने या विश्वविद्यालय अगर चाहे तो फर्स्ट इयर और सेकंड इयर को प्रोमोट कर सकते हैं, इसके लिए निर्देश दिए थे।

पहली गाइडलाइन्स के अनुसार अंतिम वर्ष की परीक्षाएं एक जुलाई से पन्द्रह जुलाई के बीच और अन्य वर्ष की परीक्षाएं सोलह जुलाई से इकत्तीस जुलाई के बीच आयोजित करने की सिफारिश की थी। इसके साथ ही एक अगस्त से एडमिशन प्रक्रिया शुरू करने की बात भी निर्देशों में कही गयी थी।

अब इन्ही दिशानिर्देशों में थोड़ा बदलाव करके UGC ने फिर से दिशानिर्देश जारी किये हैं। यह जानना जरूरी है कि आखिर इस बार क्या बदलाव किये हैं


इस बार UGC ने साफ़ कर दिया है कि विद्यार्थियों की अंतिम वर्ष की परीक्षा महत्वपूर्ण होती है इसलिए उनका आयोजित किया जाना अनिवार्य है।

अंतिम सेमेस्टर की परीक्षाएं सितम्बर के अंत तक सभी विश्वविद्यालय सम्पन्न करा दें, इसके लिए भी इस बार निर्देश दिए गये हैं। पिछली बार इन्ही परीक्षाओं को जुलाई में करवाने के निर्देश थे जोकि अब बदल दिए हैं। सितम्बर अंत तक जो परीक्षाएं होंगी, वो ऑफलाइन या ऑनलाइन किसी भी प्रकार से हो सकती हैं।

जिन छात्रों की बैक है, यानी रीअपियर है, उन सभी की परीक्षा भी सितम्बर तक अवश्य कराने के निर्देश जारी किये गये हैं।

अगर कोई विद्यार्थी किसी कारणवश इन परीक्षाओं में हिस्सा नही ले पाता तो उसके लिए बाद में फिर से विशेष परीक्षाओं को देने का मौका मिलेगा।

प्रथम वर्ष और द्वितीय वर्ष के लिए 29 अप्रैल को जारी हुई गाइडलाइन्स ही लागु होंगी।

UGC के इन दिशानिर्देशों में केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्रालय जिसे अनौपचारिक रूप से केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय भी कह सकते हैं, ने सभी प्रदेशों को कुछ निर्देश दिए हैं। उनको भी जानना जरूरी है।


मंत्रालय कहता है कि – अंतिम सेमेस्टर की परीक्षाओं का आयोजन UGC के दिशानिर्देशों के अनुसार कराना अनिवार्य है।

परीक्षाओं को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी किये गये बचाव और सुरक्षा को लेकर निर्देशों का पालन किया जायेगा।

मंत्रालय द्वारा दिए गये निर्देशों में lockdown के कारण विद्यार्थियों की मानसिक स्थिति, यातायात की व्यवस्था, और अन्य समस्याओं का जिक्र किया गया है लेकिन अमेरिका, ब्रिटेन, सिंगापूर, जर्मनी, कनाडा, आस्ट्रेलिया, की कई विश्वविद्यालयों का उदाहरण देते हुए मंत्रालय ने यह साफ किया है कि ये सभी विश्वविद्यालय अंतिम वर्ष की परीक्षाओं करा रहे हैं इसीलिए भारत में भी जरूरी है कि परीक्षाएं आयोजित की जाएँ।

मंत्रालय का मानना है कि अगर सभी देश परीक्षाएं करा रहे हैं और भारत में बिना परीक्षाओ के विद्यार्थियों को पास किया जाता है तो हो सकता है कि उन्हें भेदभाव का सामना करना पड़े। इसके साथ ही भारत द्वारा जारी की गयी डिग्री की वैधता पर भी सवाल उठ सकते हैं। इसके लिए सरकार ने परीक्षाओं को अनिवार्य किया है।

इन सभी गाइडलाइन्स को पढकर यह कहा जा सकता है कि अब राज्य सरकारों को अपने फैसले पर दोबारा सोचना पड़ेगा। इसके साथ ही राज्य सरकारों को निर्देशों को मानना अनिवार्य है या नही, यह भी देखना होगा। महाराष्ट्र मंत्री के बयान से यह साफ है कि अभी सरकारों को फैसला लेने की छुट नही दी गयी है हालाँकि राज्य सरकारें यह कोशिश जरुर करेंगी कि केंद्र राज्य सरकारों को फैसला लेने की स्वायत्ता दे जिससे राज्य सरकारें अपने अनुसार निर्णय ले सकें।

UGC की गाइडलाइन्स का विरोध भी शुरू हो गया है. छात्र संगठन वर्ल्ड स्टूडेंट यूनियन केन्द्रीय शिक्षा मंत्री को इस सम्बन्ध में पत्र लिखने की बात कह चुका है. अब देखना यह होगा कि छात्र किस आधार पर विरोध करते हैं और राज्य सरकारें क्या फैसला लेती हैं?        


एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ