हरियाणा राज्य में
कोरोना महामारी के कारण परीक्षा न कराने के लिए शुरू हुए छात्र आन्दोलन का
सफलतापुर्वक समापन हुआ। आख़िरकार सरकार ने छात्रों की समस्या को समझते हुए 23 जून
को शाम को higher education department हरियाणा ने नोटिस जारी करते हुए छात्रों की
ऑफलाइन परीक्षा न कराने के सम्बन्ध में फैसला जारी कर दिया। इस फैसले के बाद
छात्रों के अंदर ख़ुशी का माहौल बन गया लेकिन जल्द ही संशय की स्थिति बन गयी।
सरकारी नोटिस के बाबजूद अधिकारिक हायर एजुकेशन ट्विटर हैंडल का रीअपीयर को लेकर
शेयर की गयी जानकारी विद्यार्थियों के लिए चुनौती बन गयी। अब भी लगातार छात्रों
में संशय का माहौल है और स्पष्टता कहीं भी नही है। ऐसे में छात्रों की मुखर आवाज
के लिए कार्यरत गुरुग्राम मिरर लाया है विश्लेष्ण जो बतायेगा कि अब भी क्या
परेशानी हैं जो छात्रों के प्रमोशन के लिए बाधा हैं।
शाम पांच बजे जब हायर
एजुकेशन ने नोटिस जारी किया तो उसमे जो लिखा है वो छात्रों को अवश्य पढना चाहिए।
इस विभाग ने 12 जून को जारी किये गये अपने नोटिस में बदलाव करते हुए यह आदेश जारी
किया कि सभी टर्मिनल सेमेस्टर यानी फाइनल सेमेस्टर ( 6th
sem for UG and 4th sem for PG) और
इंटरमीडिएट सेमेस्टर यानी बाकि बचे सेमेस्टर की परीक्षा अब नही ली जाएगी। इसके साथ
ही अब उन विद्यार्थियों को 50 % पिछले रिजल्ट के + 50% इंटरनल असेसमेंट/असाईंमेंट
के आधार पर अगले सेमेस्टर के लिए प्रोमोट किया जायेगा। हालाँकि विद्यार्थियों को
स्थिति सामान्य होने पर परीक्षा देकर अपने अंक सुधारने का मौका दिया जायेगा।
इसके साथ ही इस
नोटिस में यह स्पष्ट लिखा था कि विश्वविद्यालय चाहें तो ऑनलाइन परीक्षा ले सकते
हैं लेकिन इसके लिए विश्वविद्यालय के पास सभी संसाधन और तैयारी होनी चाहिए।
अगले खंड में नोटिस
रीअपीयर के बारे में सरकार का पक्ष साफ़ करता है। रीअपीयर छात्र भी परीक्षा नही
देंगे और अगले सेम में प्रमोट किये जायेंगे। उनको पिछले सेमेस्टर के अंको के एवरेज
अंक दिए जायेंगे। प्रथम वर्ष वाले सभी विद्यार्थी इंटरनल के आधार पर प्रोमोट होंगे।
विभाग का आदेश कहता
है कि प्रैक्टिकल परीक्षाएं नही होंगी और उनको पिछले प्रक्टिकल एग्जाम या थ्योरी
परीक्षा में मिले अंक के 80% अंक (इन दोनों में से ज्यादा होंगे वो) दिए जायेंगे।
इसके बाद एडमिशन प्रक्रिया
के बारे में आदेश दिया गया है। ओपन/प्राइवेट और Polytechnics विद्यार्थियों के लिए भी यही आदेश मान्य रहेगा।
इस आदेश के बाद विद्यार्थियों
में मुख्य संशय रीअपीयर के लिए बन गया। सूत्रों के मुताबिक जिन विद्यार्थियों ने जिस
सेमेस्टर के रीअपीयर फॉर्म भरे थे, उन्ही सेमेस्टर में उनको प्रमोट किया जायेगा।
इसको हम ऐसे भी समझ सकते हैं कि अप्रैल-मई में प्रस्तावित परीक्षाओं को ही प्रोमोट
किया गया है। इसमें 2nd सेमेस्टर, 4th
सेमेस्टर, 5th सेमेस्टर और 6th सेमेस्टर
आते हैं। UG के लिए इन्ही सेमेस्टर की परीक्षा अप्रैल-मई में प्रस्तावित थी। इवन
सेमेस्टर में 5th सेमेस्टर के शामिल किये जाने पर संशय इसलिए नही होना चाहिए
क्योकि MDU द्वारा 5th सेम रीअपियर छात्रों को मर्सी चांस के तहत 6th सेम की
परीक्षाओं के साथ परीक्षा देने का मौका मिलता है और इनके रीअपीयर फॉर्म भी भरे जा
चुके हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि 1st और 3rd सेम
की परीक्षा अप्रैल-मई में प्रस्तावित ही नही थी क्योकि अब ये परीक्षाएं दिसम्बर
में होनी थी। इसलिए इनका प्रमोशन होना मुश्किल है।
रीअपियर छात्रों के
लिए अभी Guidelines
सरकार की तरफ से विश्वविद्यालयों को आना बाकी हैं। उसके बाद ही यह
स्पष्ट हो पायेगा कि किस आधार पर उनको प्रोमोट किया जा रहा है। अभी MDU ने सरकार
की सिफारिशों को मान लिया है और जल्द ही रीअपियर के बारे में भी स्थिति स्पष्ट हो
जाएगी।
सरकार के सामने
सबसे बड़ी चुनौती सवा लाख विद्यार्थियों का भविष्य सुरक्षित करने की है। क्योकि
प्रोमोट करके बिन परीक्षा दी गयी डिग्री पर संस्थान/कम्पनी/विश्वविद्यालय सवाल उठा
सकते हैं। इसलिए सरकार एक असाइनमेंट वर्क देने पर भी विचार कर रही है। यह कार्य
सिर्फ अंतिम सेमेस्टर के विद्यार्थियों को ही दिया जायेगा। इसके लिए अधिकारिक
सुचना का इंतजार है लेकीन सूत्रों के मुताबित विश्वविद्यालय इस पर कार्य कर रहे
हैं। यह असाइनमेंट ऑनलाइन ही सबमिट करना होगा।
हमे उम्मीद है कि काफी
विद्यार्थियों की संशय की स्थिति दूर करने में हम सफल हुए हैं। अगर आपको हरियाणा
कॉलेज एग्जाम पर आये फैसलों के बारे में कोई दुविधा है तो आप हमें ट्विटर के
माध्यम से पूछ सकते हैं।
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