अंतिम वर्ष परीक्षा को लेकर सुप्रीम
कोर्ट में आज सुनवाई पूरी हो गयी। अलग अलग राज्यों की तरफ से वकीलों ने परीक्षा न
करा पाने के राज्यों के निर्णयों को सही बताते हुए दलीलें रखीं। बंगाल, दिल्ली,
महाराष्ट्र और उड़ीसा की तरफ से राज्य सरकारों द्वारा न सिर्फ अपने फैसलों को ठीक
बताया गया बल्कि यूजीसी के परीक्षा को अनिवार्य बताने के फैसले पर सवाल भी उठाये।
आपदा एक्ट को लेकर भी दलीलें रखी गयीं जिसमे बताया गया कि राज्य सरकार फैसला लेने को
स्वतंत्र हैं। विद्यार्थियों की तरफ से दलील रख रहे अलख आलोख ने यूजीसी
दिशानिर्देशों को आर्टिकल 14 का उल्लंघन बताया साथ ही छात्र हित
में परीक्षाओं का विरोध किया। जब सभी ने अपना पक्ष रख दिया तो यूजीसी की तरफ से
तुषार मेहता ने यूजीसी का बचाव करना शुरू किया और संवैधानिक तरीके से यूजीसी के
फैसले को ठीक बताया।
हालाँकि इससे पहले कोर्ट ने यह माना कि
यूजीसी को परीक्षा कब होगी यह तय करने का अधिकार नही है लेकिन परीक्षा कैसे करानी
है, यह तय कर सकता है। इसके साथ ही कोर्ट ने यूजीसी की तरफ से पक्ष रख रहे तुषार
मेहता से सवाल पूछा कि अगर ऐसी (आपातकालीन या महामारी) परिस्थिति बनती है तो क्या
राज्य के फैसले को पलटकर यूजीसी अपना फैसला लागु करने को कह सकती है? इसके बाद तुषार
मेहता ने यह कहते हुए बात समाप्त की कि सारा देश ठीक तरह से कार्य करना प्रारम्भ
कर चुका है और परीक्षा देने वाले सभी 21-22 वर्ष के युवा हैं। ऐसे में यह कहना
गलत होगा कि वो घर से ही नही निकलेंगे।
पिछली हियरिंग जोकि 14 अगस्त को हुई थी
उसमें वरिष्ठ वकील डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी और वरिष्ठ वकील श्याम दीवान अपना पक्ष रख
चुके थे जबकि आज महाराष्ट्र की तरफ से डॉ. अरविन्द, बंगाल से टीचर्स की तरफ से
जयदीप गुप्ता, दिल्ली सरकार की तरफ से के.वी. विश्वनाथन, उड़ीसा और बंगाल के सरकारी
वकील, वरिष्ठ वकील मीनाक्षी अरोड़ा, वकील अलख आलोक आदि ने आज अपना पक्ष रखा।
इसी सुनवाई के दौरान एक अजीब स्थिति
उत्पन्न हो गयी। जब यूजीसी की तरफ से तुषार मेहता पक्ष रख रहे थे तभी जजों की बेंच
से सम्पर्क कट गया। तुषार मेहता ने इसे बिजली चली जाने के कारण बताया। इसकी वजह से
कुछ मिनट तक सुनवाई रुक गयी। बीच में आवाज आने जाने में समस्या भी आई। हालाँकि कुछ
समय बाद समस्या को ठीक कर लिया गया। इसी का फायदा उठाते हुए एक वरिष्ठ वकील ने
टिप्पणी करते हुए कहा कि इससे हम समझ सकते हैं कि विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन
एग्जाम भी आसान नही हैं।
आपको बता दें सुप्रीम कोर्ट में विडियो
कांफ्रेसिंग के जरिये यानी वर्चुअल तरीके से सुनवाई का दौर चल रहा है। सभी वकील
अपने चैम्बर से और जज भी अपने स्थान से ऑनलाइन जुड़ते हैं तो सुनवाई करते हैं। आज की
इस घटना ने यूजीसी का पक्ष जरुर कमजोर किया है।
इस सुनवाई के पूरी होने के बाद कोर्ट
ने फैसला सुरक्षित रख लिया। अब तीन दिन के अंदर अपना लिखित जबाब सभी पक्षों को
कोर्ट में देना है जिसके बाद कोर्ट फैसला सुनाएगा।

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