काफी
दिन से रीअपीयर पर जारी संशय आख़िरकार समाप्त हो गया। उच्चतर शिक्षा विभाग द्वारा सभी
विश्वविद्यालयों को नोटिस जारी करके रीअपीयर पर स्पष्टीकरण दिया गया है कि आखिर
विश्वविद्यालय क्या निर्णय लें ? इस नोटिस में सबसे पहले विभाग ने यह बताया है कि
जुलाई में उच्चतर शिक्षा विभाग हरियाणा ने फाइनल इयर को प्रोमोट करने का आदेश दिया
था जिसमें रीअपीयर को लेकर भी प्रोमोट करने का आदेश था। अब जो आदेश जारी हुआ है
उसमें सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का जिक्र किया हुआ है जिसमें बिना परीक्षा अंतिम
वर्ष विद्यार्थियों को डिग्री देने पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाये हैं। अब जब
सुप्रीम कोर्ट बिना परीक्षा अंतिम वर्ष विद्यार्थियों को पास करने के खिलाफ फैसला
सुना चुका है तो विश्वविद्यालय भी अब बिना परीक्षा किसी को पास नही कर पाएंगे।
उच्चतर
शिक्षा विभाग का आदेश विश्वविद्यालय के सामने दो विकल्प रखता है। सबसे पहला तो यह
है कि मई/जून में प्रस्तावित सभी रीअपीयर परीक्षा यानी दुसरे, चौथे सेमेस्टर की
रीअपीयर को कैरी फॉरवर्ड कर दिया जाये यानी प्रथम वर्ष में रीअपीयर वाले छात्र और
दुसरे वर्ष में रीअपीयर वाले छात्रों को अब तो पास कर दिया जायेगा और अगले वर्ष
में पदोन्नत कर दिया जायेगा लेकिन बाद में उनको ये रीअपीयर पास करनी होगी यानी
उनका बाद में एग्जाम होगा। अब जो विद्यार्थी अंतिम वर्ष के हैं यानी पांचवे और छठे
सेमेस्टर में रीअपीयर है उनको परीक्षा देनी ही होगी।
दूसरा
विकल्प यह है कि विश्वविद्यालय किसी भी छात्र को कैरी फॉरवर्ड न करें और सभी
रीअपीयर की परीक्षा सितम्बर में ही आयोजित हों। अब आखिरी फैसला विश्वविद्यालय पर
छोड़ दिया गया है। अगर हरियाणा के विश्वविद्यालयों को देखा जाये तो कुरुक्षेत्र
विश्वविद्यालय, चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय आदि ने रीअपीयर परीक्षा आयोजित करने
के आदेश जारी कर दिए हैं। ऐसे में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय भी रीअपीयर परीक्षा
आयोजित कर सकता है। हालाँकि ये परीक्षाएं किस प्रकार और कब आयोजित होंगी, इसपर
जल्द ही नोटिस जारी किया जायेगा।
गुरुग्राम
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