भारतीय
मीडिया की रेटिंग को लेकर मुंबई पुलिस के खुलासे के बाद मीडिया में जारी आपसी
युद्ध सभी के सामने आ गया है। गौरतलब है कि गुरुवार को मुंबई पुलिस के कमिश्नर
परमबीर सिंह ने एक प्रेस वार्ता में यह बताया कि मीडिया चैनलों की रेटिंग में कुछ
चैनलों द्वारा हेर फेर की गयी और पैसे देकर अपनी TRP बढाई। मीडिया चैनलों की TRP
तय करने वाली संस्था BAARC
बड़े शहरों में एक खास प्रकार का डिवाइस इस्तेमाल करके यह तय करती है कि किस चैनल
को कितना पसंद किया जा रहा है। लोगों द्वारा चैनल को देखने में कितना समय व्यतीत
किया गया, इसके आधार पर हर गुरूवार बार्क रेटिंग तय करती है जिसे TRP कहा जाता है।
मुंबई पुलिस ने बताया कि बार्क इस रेटिंग के आंकड़े जुटाने के लिए निजी कम्पनी से
कार्य लेती है जिसके पूर्व कर्मचारी ने यह जानकारी लीक की कि किस किस घर में TRP
तय करने वाले पेरामीटर लगे हैं। इसके बाद कुछ लोगों ने ऐसे लोगों द्वारा मासिक 400
से 500 रूपये देकर एक खास चैनल देखने को कहा गया। इस प्रकार से एक खास चैनल की TRP
में उछाल आया है और उससे ज्यादा विज्ञापन हासिल किये। मुंबई पुलिस का यह आरोप
वर्तमान में इंग्लिश केटेगरी में देश में पहले न. पर मौजूद रिपब्लिक टीवी और हिंदी
केटेगरी में भी पहले न. पर मौजूद रिपब्लिक भारत पर है। रिपब्लिक नेटवर्क के साथ ही
एक मराठी चैनल और एक अन्य चैनल को भी यह जालसाजी करने का आरोप लगाया गया है।
मुंबई
पुलिस की इस प्रेस कांफ्रेंस को न सिर्फ सभी चैनलों ने लाइव दिखाया बल्कि इसके बाद
लगातार रिपब्लिक के खिलाफ प्रसारण भी किया। इस कड़ी में आजतक, एबीपी न्यूज़, इंडिया
टीवी, जी न्यूज़ समेत कई बड़े चैनलों ने इस खबर पर स्पेशल शो आयोजित किये। रिपब्लिक
भारत जोकि कुछ महीने से लगातार TRP के मामले में आजतक को पीछे छोड़ रहा था, उसको “TRP
चोर” जैसे शब्द इस्तेमाल करके पर्दे के पीछे की लड़ाई सामने आ गयी है।
दरसल
रिपब्लिक टीवी की पत्रकारिता से मीडिया चैनल परेशान हैं। तेज आवाज, ज्यादा
पेनालिस्ट, शोर शराबा और जमकर तू-तू मैं-मैं यह सब मीडिया में नकारत्मक समझा जाता
था लेकिन रिपब्लिक ने इन्ही को लेकर कार्य किया। इस प्रकार सनसनी फैलाने से न
सिर्फ रिपब्लिक ने दुसरे चैनलों के दर्शको को अपनी तरफ खींचा बल्कि राजनितिक
न्यूट्रल रहने की परम्परा को भी तोड़ दिया। रिपब्लिक ने सुशांत सिंह राजपूत
आत्महत्या केस में शुरू की सीरीज को लगातार प्रसारित किया और मुंबई पुलिस एवं
सत्ताधारी शिवसेना की मिलीभगत का आरोप लगाया। इसके बाद कंगना विवाद में भी
रिपब्लिक ने शिवसेना पर सीधा निशाना साधा जिसके बाद तमाम नोटिस चैनल को भेजे गये।
चैनल के एडिटर इन चीफ एवं मालिक अर्नब गोस्वामी से पूछताछ भी हुई। इससे पहले सोनिया
गाँधी पर किये एक कमेन्ट के लिए भी अर्णव गोस्वामी को मुंबई पुलिस ने नोटिस जारी
किया था। पालघर मामले में भी रिपब्लिक ने महाराष्ट्र सरकार पर हमला बोला और CBI
जाँच की मांग की।
रिपब्लिक
और शिवसेना में तकरार किसी से छुपी नही है। इसके साथ ही रीया चक्रवर्ती का
इंटरव्यू लेने के बाद आजतक पर भी रिपब्लिक ने निशाना साधा था। हाथरस कांड में आजतक
और एबीपी न्यूज़ की रिपोर्टिंग को एकतरफा होने और जातिवाद का जहर घोलने की कोशिश
करने के आरोप लगे जिसके बाद रिपब्लिक ने हाथरस कांड को लेकर स्टिंग ऑपरेशन किया
जिसमें हाथरस कांड में कई खुलासे हुए।
यह भी दिलचस्प है कि मीडिया पर रेगुलेट करने के लिए बनी संस्था ब्रोडकास्टर एसोसिएशन जिसके सदस्य आजतक, एबीपी न्यूज़, इंडिया टीवी, जी न्यूज़ सभी हैं, इसमें रिपब्लिक शामिल नही है। रिपब्लिक का कहना है कि यह संस्था भेदभाव करती है।
अर्नब गोस्वामी ने इसके बाद अपनी अलग एसोसिएशन बना
ली। ब्रोडकास्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष इंडिया टीवी के मालिक रजत शर्मा ने अभी कुछ
दिन पहले ही कहा था कि शोरशराबा करने वाले चैनलों को कम्पनी अपने विज्ञापन न दें।
कुलमिलाकर रजत शर्मा का यह निशाना रिपब्लिक की तरफ ही था।
TRP
विवाद में अचानक मोड़ तब आ गया जब इस विवाद के सामने आने के चार घंटे बाद ही BAARC
द्वारा मुंबई पुलिस को दी गयी लिखित शिकायत सबके सामने आ गयी। इस शिकायत में
रिपब्लिक का नाम नही था बल्कि आजतक के ही सहयोगी चैनल इंडिया टुडे को TRP में
फेरबदल करने का दोषी बताया गया है। इस कड़ी के सामने आने के बाद रिपब्लिक अब दुसरे
चैनल पर हमलावर है।
कुलमिलाकर
अब मीडिया में आपसी खींचतान सभी के सामने है। TRP के पीछे भागती मीडिया का असली
चरित्र सभी के सामने आ गया है जिससे विश्वसनीयता और कम होगी।


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